सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

हरियाणा का जिला कुरुक्षेत्र

 कुरुक्षेत्र


स्थिति-

 हरियाणा के उत्तरी भाग में स्थित है।

 इसके उत्तर में अंबाला ,उत्तर पूर्व में यमुनानगर ,पश्चिम में कैथल और दक्षिण में कैथल व करनाल जिले स्थित है।

 स्थापना -23 जनवरी 1973 नामकरण -राजा गुरु के नाम पर। उपनाम -धर्म नगरी ,तीर्थराज, सिटी ऑफ पाकर्स।

क्षेत्रफल- 1530 वर्ग किलोमीटर।


 मुख्यालय- कुरुक्षेत्र।

 उपमंडल -थानेसर, पेहवा, शाहाबाद ।

नदी -सरस्वती।

 मुख्य फसल- गेहूं व चावल।

 अन्य फसल- गन्ना ,तिलहन, व आलू।

 सड़कों की लंबाई- 1023 किलोमीटर।

 प्रमुख रेलवे स्टेशन- कुरुक्षेत्र 

 लिंग अनुपात -889 

जनसंख्या -994231 

साक्षरता दर- 76प्रतिसत।


 ऐतिहासिक तथ्य- कुरुक्षेत्र जिला महाभारत युद्ध श्रीमद भगवत गीता के जन्म स्थली के रूप में प्रसिद्ध है।

 बोध ओर जैन साहित्य में जिस थून  अथवा थुना  का उल्लेख किया गया है। वही स्थान आगे स्थानेश्वर अथवा थानेश्वर कहलाया थानेश्वर वर्धन वंश व श्रीकंठ जनपद के राजाओं की राजधानी रही है ।

1832 में थानेश्वर रियासत के शासक जामित के कोई पुत्र ने होने से इसे ईआईसी ईस्ट इंडिया कंपनी में मिला दिया गया।

 1805 में व1845 के विद्रोह विद्रोह का नेतृत्व अजीत सिंह ने किया ।

मोहम्मद गजनबी ने थानेसर पर प्रथम आक्रमण 1009 तथा प्रसिद्ध आक्रमण 1014 में किया।

 पेहोवा का प्राचीन नाम पृ थुदक था ।

दूसरी शताब्दी की  लाल पत्थर की  मूर्तियां कुरुक्षेत्र से प्राप्त हुई हैं।

 कुरुक्षेत्र में 6 प्रसिद्ध ऋषि हुए हैं व्यासवनस्थली, विश्वामित्र पहवो वरिष्ठ पेहोवा, ययाति पर हुआ मारकंडे कुरुक्षेत्र और दधीचि दधीचि कुरुक्षेत्र।

 थानेसर को मुगलों का द्वीप भी का जाता है।

 श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश सरस्वती नदी के किनारे ज्योतिसर सरोवर के तट पर बरगद अथवा वट के वृक्ष के नीचे दिया। 

 हड़प्पा संस्कृति के नगर भगवानपुरा खोज जगपति जोशी द्वारा 1976 -77में की गई यहां से चित्रित धूसर मृदभांड प्राप्त हुए तथा इस सभ्यता का दूसरा अन्य नगर दौलतपुरा कुरुक्षेत्र में है यहां से सिंधु सभ्यता की मिट्टी की मोहरे प्राप्त हुई ।

कुरुक्षेत्र के प्रमुख तथ्य-

 जिले में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की स्थापना एक आवासीय विश्वविद्यालय के रूप में 11 जनवरी 1956 को राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने नीव रखी।

 एशिया की दूसरी सबसे बड़ी अनाज मंडी लाडवा कुरुक्षेत्र में है। पहली चीन में है।

 आलू शकरकंदी का उत्पादन कुरुक्षेत्र जिला करता है।


 आकाशवाणी कुरुक्षेत्र की स्थापना 24 जून 1991 को की गई ।

परदेस का जनसंचार व मीडिया तथा आयुष विज्ञान विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र जिले में बनेगा।

 कुरुक्षेत्र में ही प्रवेश का पहला वेलोड्रोम साइकिलिंग का गोल घेरा बनाया गया।

 कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड स्वर्गीय श्री गुलजारी लाल नंदा के प्रयासों से 1 अगस्त 1968 को कुरुक्षेत्र में स्थित तीर्थों के विकास हेतु गठन किया इसका पदेन अध्यक्ष मुख्यमंत्री को बना दिया ।

1989 में प्रथम बार गीता जयंती उत्सव मनाया गया विकास बोर्ड के प्रावधान में 1992 में गीता जयंती समारोह का गठन किया गया ।

2012 में कुरुक्षेत्र में धार्मिक स्थलों के आसपास मदिरा बेचने पर रोक लगा दी गई ।

काला तीतर प्रजनन केंद्र यहां 1986 तथा छोटा चिड़ियाघर पीपली 1982 में स्थापित किया गया ।

कुरुक्षेत्र हरियाणा में एकमात्र जिला है जिसके स्वयं के नाम पर विधानसभा सीट नहीं है।

 राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान एनआईटी की स्थापना कुरुक्षेत्र में 2002 में की गई यह सर्वप्रथम एक रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज के रूप में 1962 में स्थापित किया गया था ।

हरियाणा का सबसे छोटा वन्य जीव अभ्यारण केंद्र जिला 29 किलोमीटर कुरुक्षेत्र में 28 नवंबर 1986 को स्थापित किया गया। यह शीतकालीन पक्षियों की आवाज के लिए प्रसिद्ध है सिलसिला में सीयो नथी नामक जंगल है।

 हरियाणा का सबसे ज्यादा पर्यटक स्थल कुरुक्षेत्र जिले हैं जिले में प्रमुख पर्यटक स्थल पैराकि,नीलकंठ अंजन यात्रिका पेओवा हुआ है।

 कुरुक्षेत्र के धार्मिक व दर्शनीय स्थल -

ब्रह्मसरोवर -यह थानेसर के नजदीक स्थित है .।माना जाता है कि भगवान ब्रह्म ने इस सरोवर को खुदवाया था । काफी इतिहासकार इसे राजा को कुरु द्वारा खुदा मानते हैं ।यह हरियाणा का सबसे बड़ा प्राकृतिक सरोवर है 18 50 में डीसी कल के ने इसकी पुणे खुदाई करवाई सरोवर का उल्लेख अलबरूनी ने भी अपनी पुस्तक में किया है ब्रह्मसरोवर का वर्तमान स्वरूप गुलजारी लाल नंदा की देन है इसकी लंबाई 3600 फीट चौड़ाई 15 00फीट है।

 गीता भवन -यह ब्रह्मसरोवर के उत्तरी तट पर है। तथा इसका निर्माण में रीवा मध्य प्रदेश के राजा ने करवाया इसे कुरुक्षेत्र पुस्तकालय भी कहा जाता है।


 कालेश्वर तीर्थ अथवा बिरला मंदिर यह हरियाणा का एक माता रूद्र मंदिर है मंदिर में भगवान गीता के सभी श्लोक लिखे हुए हैं।


 शेख चिल्ली का मकबरा- यह थानेसर में स्थित है ।इसका निर्माण 70 वीं शताब्दी में साहजहां व दारा सिंह  ने अपने गुरु शेखचिल्ली की याद में करवाया इसी हरियाणा का ताज महल कहा जाता है ।

स्थानेश्वर महादेव मंदिर -

यह थानेसर में स्थित है तथा इसका निर्माण छठी शताब्दी में वर्धन वंश के संस्थापक पुष्यभूति ने करवाया था तथा इसका पुनर्निर्माण सदाशिव मराठा ने करवाया था।

 ज्योतिसर सरोवर -यह पेहोवा पर सरस्वती नदी के किनारे लुप्त प्रभाव पर स्थित है ।यहां श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था ।

सर्वेश्वर महादेव मंदिर -कुरुक्षेत्र जिले में स्थित इस मंदिर का निर्माण सरवन नाथ ने  करवाया था ।

मारकंडेश्वर मंदिर -कुरुक्षेत्र जिले के गोमती गांव में यह मंदिर 1953 प्रकाश वति ने ।


बनवाया था।

 बाणगंगा -थानेश्वर ज्योतिसर मार्ग पर नर काशी गांव में अर्जुन ने दादा भीष्म पिता की प्यास बुझाने के लिए हेतु बाण मारकर यहां गंगा निकाली थी ।

बाबा काली कमली वाले का डेरा- इसका निर्माण विशुद्धानंद ने करवाया था ।

कमलनाथ तीर्थ सथल व चंद्रकूप कुरुक्षेत्र जिले में स्थित है।


 सन्निहित सरोवर, कुबेर तीर्थ स्थल तथा पुंडरीक सरोवर कुरुक्षेत्र में स्थित है।

 गुरुद्वारा छठी पातशाही गुरु हरगोविंद से संबंधित, गुरुद्वारा 9वी पातशाही गुरु तेग बहादुर से संबंधित, व राजघाट गुरुद्वारा सिखों के दसवें गुरु गुरु गोविंद से संबंधित है।

 कुरुक्षेत्र के प्रसिद्ध खिलाड़ी -रितु रानी रामपाल ,शाहाबाद ,भारत की हॉकी टीम की कप्तान है।


 अमनदीप- स्टील मैन ऑफ इंडिया ।

नवजोत कौर- हॉकी खिलाड़ी। नवनीत कौर -हॉकी खिलाड़ी।


 कुरुक्षेत्र के प्रसिद्ध मेले- देवी का मेला -यह शाहाबाद में अप्रैल माह में लगता है ।

महावीर जयंती उत्सव लाडवा में मार्च माह में लाता है ।

बैसाखी का मेला 13 अप्रैल, पेहवा का मेला मार्च माह में लगता है।

 मारकंडे, शाहाबाद का मेला, सूर्यग्रहण का मेला ब्रह्मसरोवर।


 मगरमच्छ प्रजनन केंद्र भोर सैदान 1981-82 में स्थापित किया गया । 

शाहाबाद चीनी मिल की स्थापना 1984 -85 में की गई।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

हरियाणा का जिला जींद

हरियाणा के जिले  जींद के बारे मे 1नवम्बर 1966को जींद की स्थापना हुई। नामकरण-जयंती देवी के नाम पर।   उपमण्डल-जींद ,सफीदों,नरवाना  तहसील-जींद,सफीदों,नरवाना, जुलाना। उपतहसील-अलेवा,पिल्लूखेड़ा, उचाना कला।क्षेत्रफल-2702वर्ग किलोमीटर। हरियाणा का हृदय जींद और जींद का हृदय रानी तालाब है।  हरियाणा के 7 जिलों की सीमा जींद से लगती है ।यह 7 जिले हैं-  रोहतक ,करनाल ,हिसार, सोनीपत, पानीपत, कैथल फतेहाबाद।   ऐतिहासिक तथ्य - .कहा जाता है कि महाभारत युद्ध से पूर्व युधिसीटर ने जयंती देवी की प्रार्थना की थी तथा यही एक मंदिर का निर्माण करवाया बाद में यही जयंतीपुर से जिंद बना । .रामायण श्लोक अंकित अभिलेख नचार खेड़ा से प्राप्त हुआ । .जींद का विद्रोह 1835 में बलियाली विद्रोह के रूप में गुलाब सिंह के नेतृत्व में लड़ा गया।   राजा रघुवीर सिंह-   18 64 - 18 80 ने यहां भूतेश्वर महल का निर्माण करवाया जिसे आज रानी के तालाब के नाम से जाना जाता है। . जिंद का विद्रोह 1814 ईस्वी में प्रताप सिंह के नेतृत्व में हुआ।  .जींद के नगर सफीदों का प्राचीन नाम सफर दमन था यह राजा जन्मेजय स...

हरियाणा का जिला सोनीपत (Sonipat)

 सोनीपत जिले के बारे मे  स्थापना -22 दिसंबर 1972 नामकरण- महाभारत कालीन नाम सोन प्रस्थ से | उपमंडल -सोनीपत, गोहाना, गन्नौर, खरखोदा | तहसील- सोनीपत, गोहाना गननोर, खरखोदा।  उप तहसील- खानपुर कला। खंड- सोनीपत, गोहाना ,गन्नौर, खरखोदा, मुंडलाना, कथुरा।  जनसंख्या -1450000  क्षेत्रफल -21 22 वर्ग किलोमीटर ।  लिंगानुपात -856/1000 साक्षरता दर -80.53 % ऐतिहासिक तथ्य - महाभारत काल में दुर्योधन ने युधिष्ठिर को 5 गांव प्रदान किए इनमें वर्तमान सोनीपत  (सोनपरस्त) भी था इसके अलावा (पनप्रस्थ )पानीपत ,तिलपत, बागपत, इंद्रप्रस्थ  थे। 1192 के  तराईन युद्ध की शुरुआत गोहाना से हुई तथा यही पृथ्वीराज चौहान का सेनापति दरिया सिंह मारा गया था । गोहाना की दो प्राचीन  नाम गउ धमना व गवम भावना थे।  हरियाणा में सर्व प्रथम जबरदस्ती मुसलमान  राजपूत तेज सिंह 1238 व फेरलमल 1239 को गुलाम वंश के दौरान गोहाना में इन दोनों को मुसलमान बनाया गया।  हरियाणा में हिंदू मंदिरों को 1352 के आसपास फिरोजशाह तुगलक ने तुड़वाया।  पुष्यभूति वंश का शासक सोनीपत में ही में भी था...

हरियाणा का जिला रेवाड़ी

रेवाड़ी जिले के बारे मे  स्थापना-1989 नामकरण-बलराम की पत्नी अथवा राजा रेवत की बेटी रेवती के नाम पर। उपनाम-  ब्रास सिटी अथवा पीतल नगरी ,तांबा नगरी, वीर सिटी,तिल्ला जुती नगरी। उपमण्डल- रेवाड़ी, कोसली, बावल।  तहसील-रेवाड़ी, कोसली,बावल। उपतहसील- धारूहेड़ा मनेठि , डेहना ,बावल। खंड -रेवाड़ी ,खोल,जाटूसना, नाहड ,बावल । जनसंख्या -900 332  जनसंख्याघनत्व- 565 व्यक्ति वर्ग किलोमीटर । साक्षरता दर -82.33%  क्षेत्रफल- 1594 वर्ग किलोमीटर।ऐतिहासिक तथ्य-  17 वीं शताब्दी में औरंगजेब ने रेवाड़ी की जागीरदारी नंदराम आर्य को सौंप दी । 18 57 की क्रांति का रेवाड़ी से प्रमुख नेता राव तुलाराम रहा ।राव तुलाराम हरियाणा की ओर से राष्ट्रीय स्तर के नेता थे उनका जन्म राव पूर्ण सिंह के घर रेवाड़ी में 9 दिसंबर 1825 को उनकी मृत्यु अफगानिस्तान में 23 सितंबर 1863को हुई ।यह दिन हरियाणा में शहीदी दिवस के रूप में मनाया जाता है । हेमू पानीपत के युद्ध में अकबर से 1556 में हार गया ।रेवाड़ी को ऐतिहासिक पटल पर लाने का श्रेय हेमूको जाता है । 1880 में रेवाड़ी में स्वामी दयानंद सरस्वती ने गोशाला तथा आर्य सम...

हरियाणा के जिले सिरसा के बारे में पढ़े

  सिरसा -    सिथति- हरियाणा के उत्तरी पश्चिमी भाग में स्थित है ।इसके उत्तर में पंजाब राज्य का भटिंडा, उत्तर पूर्व में मानसा ,उत्तर पश्चिम में मुक्तसर जिला, पश्चिम और दक्षिण में राजस्थान राज्य का हनुमानगढ़ जिला, पूर्व में फतेहाबाद जिला स्थित है।   स्थापना-  26 अगस्त 1975 को नया जिला बना । क्षेत्रफल- 4277 किलोमीटर मुख्यालय- सिरसा।  उपमंडल- सिरसा, डबवाली, ऐलनाबाद, कालावाली।  तहसील -सिरसा, डबवाली, ऐलनाबाद ,रानियां, नाथूसरी, चोपटा।  उप तहसील- नाथूसरी चौपटा और कालावाली।  नदियां -घग्गर । मुख्य फसलें -कपास व गेहूं।  अन्य फसलें- तिलहन, चना व चावल । मुख्य उद्योग- कपास ,चटाई पावर लूम व कागज उद्योग।  प्रमुख रेलवे स्टेशन- सिरसा।  नामकरण - राजा सरस के नाम पर।  जनसंख्या घनत्व- 303 व्यक्ति प्रति किलोमीटर।  लिंग अनुपात- 897  सिरसा के ऐतिहासिक तथ्य- 1857 की क्रांति का नेतृत्व नूर मोहम्मद खान ने किया । 18 57 की क्रांति में अंग्रेजों ने सिरसा के लुढे सर गांव में अनेक क्रांतिकारियों की हत्या करवा दी थी।  सिरसा अभिलेख क...

हरियाणा में मिट्टी की विविधता एवं विशेषताएं

 हरियाणा में मिट्टी की विविधता एवं विशेषताएं  हरियाणा प्रदेश में केवल उत्तर तथा दक्षिण की पहाड़ियों को छोड़कर समस्त क्षेत्र की मिट्टी लगभग उपजाऊ है। धरातलीय आकार पर तीन प्रकार के मीठी चित्र हैं पहाड़ी, जलोढ़ का मैदान, रेतीला मैदान । पहाड़ी - पहाड़ी निम्न कोटि की मिट्टी होती है ।यह नारायणगढ़ ,कालका तहसील क्षेत्र में ऐसी मिट्टी  पाई जाती हैं ।सिरसा से नारनौल तक बालू का प्रधान दोमट मिट्टी पाई जाती हैं। यह मोटे अनाजों के लिए उपयुक्त है ।इन दोनों  क्षेत्रों के मध्य जलोढ़ मिट्टी पाई जाती है। यही उपजाऊ मिट्टी है। नदियों के साथ-साथ खादर नवीन जलोढ़ तथा किनारों से दूर बांगर पुरानी जलोढ़ मिट्टी पाई जाती है।  हल्की दोमट मिट्टी को दो भागों में बांटा गया है। अपेक्षाकृत बलुई दोमट मिट्टी ,बलुई दोमट मिट्टी। अपेक्षाकृत बलुई दोमट मिट्टी  बालू की मात्रा अधिक होने से जल धारण करने की क्षमता अधिक होती है इस मिट्टी में टपकन फुहारों द्वारा सिंचाई उपयुक्त में मानी जाती है ।यह मैदान भूमिगत जल नीचा व ज्यादातर जगह पर पानी खारा होता है ।इस मृदा को रोसली  भी कहा जाता है इसका विस्ता...

हरियाणा के राष्ट्रीय उद्यान एवं वन्य जीव अभ्यारण

  हरियाणा के राष्ट्रीय उद्यान एवं वन्य जीव अभ्यारण - सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान -1971 में पक्षी वैज्ञानिक डॉक्टर सलीम अली ने सुल्तानपुर में सलीम अली .पक्षी विहार की स्थापना की ।1972 में ही इसे ही सुल्तानपुर पक्षी विहार अथवा जीव अभ्यारण केंद्र का दर्जा दीया ।1989 में इसे राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया। इसमें सुचारू रूप से कार्य 1991 में शुरू हुआ सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान साइबेरियस सारस के लिए प्रसिद्ध है ।इसका क्षेत्रफल 1 .4 3 वर्ग किलोमीटर है।   कलेसर राष्ट्रीय उद्यान- यह यमुनानगर में स्थित है। यह लाल जंगली मुर्गों के लिए प्रसिद्ध है ।इसे दिसंबर 2003 में राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया।   वन्य जीव अभ्यारण  बीर शिकारगढ़- वन्य जीव अभ्यारण की स्थापना 29 मई 1989 को पंचकूला में हुई यह सांभर ,चितल व नीलगाय के लिए प्रसिद्ध है । कलेसर -यमुनानगर में कलेसर वन्य जीव अभ्यारण की स्थापना 13 जनवरी 2000 में की गई।  तथा यह भोकने वाले हिरणों के लिए प्रसिद्ध है। यह 11570 एकड़ भूमि पर विस्तृत है। इसे पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र घोषित किया गया है।   खापडवास -  यह  ...

हरियाणा का जिला पानीपत के बारे में Panipat

 पानीपत जिले के बारे में पढ़े सिथति-हरियाणा के  मध्य पूर्व में पानीपत जिला स्थित है । इसके पूर्व में उत्तर प्रदेश, उत्तर में करनाल ,पश्चिम में  जींद, दक्षिण में सोनीपत  जिला स्थित है। - स्थापना- 1 नवंबर 1 9 8 9 को नया जिला बना  । नामकरण -पाणिनि ऋषि के नाम पर । उपनाम -बुनकर सिटी, केमिकल सिटी । मुख्यालय- पानीपत।  क्षेत्रफल -1268 किलोमीटर जनसंख्या- 1 2 5 437 उपमंडल- पानीपत, समालखा तहसील- पानीपत ,समालखा, इसराना । उप तहसील -बापौली व मंडलोडा नदियां- यमुना नदी जिले के पूर्व से बहती   हैं । मुख्य फसलें- गेहूं ,चावल  अन्य फसलें -गन्ना एवं सब्जियां प्रमुख खनिज- प्रमुख उद्योग सूती व ऊनी वस्त्र ,विद्युत उपकरण, चीनी, पैट्रोलियम रासायनिक पदार्थ एवम कालीन । सड़कों की लंबाई -1044 किलोमीटर  प्रमुख रेलवे स्टेशन- पानीपत।  पर्यटक स्थल -स्काई लार्क, काला अंब, ब्लू रखें समालखा ,शिव मंदिर । विशेष-पानीपत हैंडलूम व कालीन उद्योग के लिए विशेष विख्यात हैं भारत 2004 के अनुसार हरियाणा से हार्दिक बासमती चावल का   निर्यात करने वाला बाजार पानीपत ही है ।पान...

हरियाणा के जिले यमुनानगर के बारे मे पढ़े

  यमुनानगर   स्थिति - हरियाणा राज्य के उत्तर पूर्व में स्थित है ।इसके उत्तर में हिमाचल प्रदेश ,पूर्व में उत्तर प्रदेश ,दक्षिण पूर्व में करनाल जिला ,दक्षिण में कुरुक्षेत्र और पश्चिम में अंबाला जिला स्थित है।  स्थापना - यह जिला 1 नवंबर 1989 को गठित हुआ था।  क्षेत्रफल -176 8 वर्ग किलोमीटर नामकरण -यमुना नदी के किनारे स्थित होने के कारण।  उपनाम -पेपर सिटी । उपमंडल -जगाधरी, बिलासपुर। तहसील -जगाधरी ,छछरौली, बिलासपुर ,राठौर । उप तहसील- सढोर, मुस्तफाबाद (सरस्वती नगर)।  जनसंख्या घनत्व- 687  व्यक्ति वर्ग किलोमीटर।  लिंगानुपात- 877  साक्षरता दर- 77 .99 प्रतिशत  ऐतिहासिक तथ्य- यमुनानगर जिले में छह प्रमुख  रियासत थी।  छछरौली रियासत-इस को गुरु बक्स ने स्थापित किया था ।1818 में रानी रामकोर की अयोग्यता के कारण ईस्ट इंडिया कंपनी ने विलय कर लिया और बाद में जोधा सिंह ने इसका विरोध किया । मुस्तफाबाद -इस रियासत को 1763 में देसू सिंह ने बसाया वर्तमान में इसका नाम सरस्वती नगर है । सढौर -यह रियासत तीन प्रमुख मंदिरों तथा बुदधू साह गुरुद्वारे के लिए प्रस...

1857 की क्रांति मे हरियाणा का योगदान

  1857 की क्रांति मे हरियाणा का योगदान- *1857की क्रांति की शुरुआत 10 मई 18 57 ई को मेरठ से हुई थी तथा 18 57 की क्रांति की शुरुआत अंबाला हरियाणा से हुई थी।  अट्ठारह सौ सत्तावन की क्रांति की सूचना अंग्रेजों को श्याम सिंह ने दी थी । इस क्रांति का तत्कालीन कारण चर्बी वाले कारतूस थे  18 43 ईस्वी में अंबाला कैंट बना था।  इस क्रांति में शहीद होने वाला पहला क्रांतिकारी मंगल पांडे था।  इस क्रांति का प्रतीक चिन्ह कमल, चपाती ,रोटी था ।  *पटौदी का नेतृत्व - अकबर अली ने किया था। * पानीपत का नेतृत्व- इमाम अली कलंदर ने किया था। * रेवाड़ी का नेतृत्व- राव तुला राम ने किया था। * मेवात का नेतृत्व- सदरूद्दीन मेवाती ने किया था। * रानियों का नेतृत्व- नूर मोहम्मद खान ने किया था। * हिसार का नेतृत्व- मोहम्मद आजम ने किया था। * रोहतक का नेतृत्व- विसारत अली ने खान ने किया था। * झज्जर का नेतृत्व -अब्दुल रहमान खान ने किया था।  * बल्लभगढ़ का नेतृत्व- राजा नाहर सिंह ने किया था। * हांसी का नेतृत्व -लाला हुकम चंद और  मुनीर बेगम ने किया था। * नसीबपुर का नेतृत्व- गोपाल सिंह नारनौल न...