हरियाणा की प्रमुख झीले-
दमदमा झील ,खलीलपुर झील, सुलतानपुर झील, कोटला झील, बड़खल झील ,ब्रह्मसरोवर झील, सन्निहित झील, हाथी कुंड, करण झील ,संगेल झील ,चंदेरी झील, भिंडावास झील, ब्लू बर्ड झील।
गुरुग्राम की झीलें-
यह झील गुरुग्राम जिले में है यह हरियाणा की सबसे बड़ी झील है। यह 300 एकड़ में फैली हुई है। सुलतानपुर झील-
यह झील गुरुग्राम जिले के फरुखनगर में स्थित है यह प्रवासी पक्षियों के लिए प्रसिद्ध है ।इसके अलावा खलीलपुर झील गुरुग्राम में है यह गर्म पानी का चश्मा गुरुग्राम के सोहना क्षेत्र में है।ओ
फरीदाबाद की झीलें-
सूरजकुंड झील- इसकी खुदाई 11वीं शताब्दी में की गई थी। इसका निर्माण सूरजपाल तोमर द्वारा करवाया गया था।
बड़खल झील- यह अरावली की पहाड़ियों से घिरी हुई है ।यह दिल्ली के मात्र 30 किलोमीटर दूरी पर स्थित है 1947 में सिंचाई परियोजनाओं के लिए इसका निर्माण किया गया था। इसका उद्देश्य भूमि कटाव को रोकना था तथा दो छोटी पहाड़ियों को जोड़कर 64 .45 मीटर लंबा और 6 मीटर चौड़ा बाढ़ के पानी को रोकना की वयवस्था की गई। इसी कारण यह पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र भी बन गई। यह झील कुल 206 एकड़ में फैली हुई है ।
झज्जर जिले की झील-
जिले में हरियाणा की सबसे बड़ी झील है जिले की एकमात्र झील भिंडावास झील है ।1885 में वन्यजीव आरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया।
कुरुक्षेत्र की झील-
ब्रह्मसरोवरझील- भगवान ब्रह्मा द्वारा खो दी हुई मानी जाती है। अलबरूनी ने अपनी पुस्तक में उल हिनद मे इसका वर्णन किया है।
- सन्निहित झील -इसे सरस्वती की 7 नदियों का मिलन स्थल कहा गया है।
मेवात की झील -मेवात में कोटला झील है,मेवात में संगेल झील स्थान उजीना में स्थित है।
अन्य झीलें- हिसार जिले में ब्लू बर्ड झील स्थित है ।
रोहतक में तिल्यार झील ,करनाल जिले में कर्ण झील है जो लगभग 17 एकड़ में फैली हुई है, करण झील का निर्माण 1972 में किया गया था ।
चिल्ली झील फतेहाबाद,यमुनानगर की हथनीकुंड झील ताजे वाले बांध पर स्थित है।

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