हरियाणा राज्य का भौगोलिक परिचय
मैदान :-
हरियाणा 27 डिग्री 39 सेंटीग्रेड से 30 डिग्री 35 डिग्री उत्तरी अक्षांश तथा 74 डिग्री 28 सेंटीग्रेड से 77 डिग्री 36 सेंटीग्रेड पूर्वी देशांतर के मध्य स्थित है।
.हरियाणा राज्य भारत का उत्तर पश्चिमी राज्य हैं। इसके उत्तर पूर्व में उत्तर प्रदेश ,उत्तराखंड, उत्तर पश्चिम में पंजाब, दक्षिण पश्चिम में राजस्थान तथा उत्तर पूर्व में हिमाचल प्रदेश स्थित है। हरियाणा भारत का एक ऐसा राज्य है। जिसकी सीमाएं न तो सागर तट को छूती है और ना ही अंतरराष्ट्रीय सीमा को।
हरियाणा का क्षेत्रफल 44212 वर्ग किलोमीटर है। क्षेत्रफल की दृष्टि से हरियाणा देश का 21 वा राज्य हैं।
हरियाणा का क्षेत्रफल भारत के कुल क्षेत्रफल का 1. 3 4 प्रतिशत है ।
हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़ है।
हरियाणा घग्घर और यमुना नदियों के मध्य एक विशाल मैदान है। हरियाणा के उत्तर पूर्व भाग में पंचकूला जिले में स्थित शिवालिक की श्रेणियां है जो कि कुल क्षेत्रफल का 1.67 प्रतिशत है।
हरियाणा के दक्षिण भाग में फरीदाबाद, गुरु ग्राम ,रेवाड़ी तथा महेंद्रगढ़ जिलों में अरावली पर्वत की पहाड़िया पाई जाती हैं। जो क्षेत्रफल का 1.38% है। दोनों उच्च भूमियों के मध्य एक सपाट विशाल मैदान है इस मैदान की समुद्र तल से ऊंचाई 200 से 300 मीटर हैं ।
भौगोलिक संरचना
हरियाणा को मुख्य 8 प्रदेशों में विभाजित किया गया है।
शिवालिका ,जलोढ़ मैदान ,बालू का डिब्बे युक्त मैदान, गिरी पाद मैदान ,तरंगित बालू मैदान, अरावली का पथरीला मैदान, अंकाई दलदल ,बाढ़ का मैदान।
शिवालिक मैदान-
हरियाणा में इसका विस्तार उत्तर पूर्वी भाग में है। यह अंबाला, पंचकूला तथा यमुनानगर के उत्तरी पूर्वी भाग हैं ।शिवालिका के निर्माण की श्रेणियों की ऊंचाई हरियाणा में 900 से 1514 मीटर तक है शिवालिका का निर्माण दक्षिण में स्थित संक्री खाई के तल का नदियों द्वारा निक्षेपण के परिणाम स्वरूप ऊपर उठने से हुआ है। पंचकूला से 30 किलोमीटर दूर स्थित हरियाणा की सबसे ऊंची पहाड़ी मोरनी की पहाड़ी है । मोरनी की पहाड़ी की सर्वोच्च चोटी करोह 1514 मीटर है ।
जलोढ़ का मैदान -
यह मैदान शिवालिका के गिरी पाद से अरावली तक तथा घग्गर और यमुना नदियों के मध्य का भाग है इसलिए इसी बांगर का मैदान भी कहा जाता है यह मैदान यमुनानगर ,अंबाला, सोनीपत, पानीपत ,करनाल ,जींद, रोहतक, सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, गुरुग्राम ,मेवात व फरीदाबाद जिलों में विस्तृत हैं ।इस मैदान की सामान्य ऊंचाई 220 मीटर से 280 मीटर है ।इस मैदान में मारकंडा ,टो चौटांग और सरस्वती नदियां बहती हैं।
गिरी पाद का मैदान
इस मैदान का निर्माण नदियों द्वारा भारी मात्रा में पत्थर, रेत, कंकड़, बजरी बहा कर लाने से हुआ है ।इस मैदान का विस्तार यमुना से घग्गर नदी तक यमुनानगर ,अंबाला ,पंचकूला जिले में हुआ है ।यह मैदान शिवालिक पहाड़ियों के दक्षिण में 25 किलोमीटर चौड़ी पट्टी के रूप में है इस भाग को स्थानीय भाषा में घर कहा जाता है ।इस मैदान में नदियों द्वारा बनाई गई गहरे गड्ढे को पहाडी भाषा में चो कहा जाता है। यह एक कम उपजाऊ मैदान है ।इसका डाल उत्तर पूर्व से दक्षिण पश्चिम की तरफ है इसकी औसत ऊंचाई 300-375मीटर है।
बाढ़ का मैदान
इस मैदान का विस्तार क्षेत्रफल हरियाणा के पूर्वी भागों में है। इसका निर्माण यमुना और उसकी सहायक नदियों से हुआहै हरियाणा के पूर्व किनारों यमुनानगर से फरीदाबाद तक बहती है। हरियाणा के उत्तर पश्चिमी भाग में मार कंडा तथा घग्घर नदियों द्वारा बाढ़ का मैदान निर्मित हुआ है । मारकंडा दवारा निर्मित मैदान को बेट तथा घग्घर द्वारा निर्मित मैदान को नेली कहा जाता है ।
अनकाई दलदल क्षेत्र
यह क्षेत्र हरियाणा के पश्चिम जिले सिरसा के दक्षिण भाग में विस्तृत है ।यह क्षेत्र हरियाणा का सबसे कम ऊंचाई वाला भूभाग है। इसकी ऊंचाई समुद्र तल से 200 मीटर से भी कम है ।इस क्षेत्र के निर्माण का मुख्य कारण धरातल के मंदडाल के कारण जल प्रभाव में अवरोध पैदा होना है सिरसा का नेल्ली क्षेत्र कम उथला तथा चौड़ा है।
अरावली का पथरीला मैदान
हरियाणा के दक्षिण में स्थित इस मैदान में फरीदाबाद ,महेंद्रगढ़, मेवात ,रेवाड़ी ,भिवानी तथा गुरु ग्राम जिले आते हैं। इस क्षेत्र का सबसे ऊंचा भाग महेंद्रगढ़ जिले में स्थित दोषी की पहाड़ी है। इसकी ऊंचाई 652 मीटर के लगभग है दोषी की पहाड़ी महेंद्रगढ़ जिले में नारनौल नगर के कुलताजपुर गांव में स्थित है। यह क्षेत्र काफी उबड़ खाबड़ है। अरावली का दूसरा क्षेत्र नीमन क्षेत्र के रूप में दिल्ली के धौलाकुआं से करोल बाग में होता हुआ दिल्ली विश्वविद्यालय तक फैला है ।अरावली पथरीली मैदान की ऊंचाई 225 से 500 मीटर तक है ।
तरंगित बालू का मैदान
यह हरियाणा का दक्षिण भाग है यह भाग महेंद्रगढ़, रेवाड़ी तथा गुरु ग्राम स्थित अरावली की पहाड़ियों के आसपास का मैदान है इसलिए इसका निर्माण वायु की क्रिया से हुआ है ।
बालूके टीब्बे युक्त मैदान
यह भाग पश्चिम में हरियाणा व राजस्थान की सीमाओं के साथ-साथ भिवानी, हिसार, झज्जर ,रेवाड़ी से महेंद्रगढ़ जिले में विस्तृत है। इस मैदान का भूमिगत जल नीचे और ज्यादातर जगह पर खा रा है। इन डिब्बों की ऊंचाई 3 से 15 मीटर तक होती है। इन टिब्बों के निम्न स्थल को ताल कहा जाता है । इन तालों में अस्थाई छिछली झिलो का निर्माण होता है। इन्हें ठाठ या बावड़ी कहा जाता है।

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