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हरियाणा में मिट्टी की विविधता एवं विशेषताएं

 हरियाणा में मिट्टी की विविधता एवं विशेषताएं  हरियाणा प्रदेश में केवल उत्तर तथा दक्षिण की पहाड़ियों को छोड़कर समस्त क्षेत्र की मिट्टी लगभग उपजाऊ है। धरातलीय आकार पर तीन प्रकार के मीठी चित्र हैं पहाड़ी, जलोढ़ का मैदान, रेतीला मैदान । पहाड़ी - पहाड़ी निम्न कोटि की मिट्टी होती है ।यह नारायणगढ़ ,कालका तहसील क्षेत्र में ऐसी मिट्टी  पाई जाती हैं ।सिरसा से नारनौल तक बालू का प्रधान दोमट मिट्टी पाई जाती हैं। यह मोटे अनाजों के लिए उपयुक्त है ।इन दोनों  क्षेत्रों के मध्य जलोढ़ मिट्टी पाई जाती है। यही उपजाऊ मिट्टी है। नदियों के साथ-साथ खादर नवीन जलोढ़ तथा किनारों से दूर बांगर पुरानी जलोढ़ मिट्टी पाई जाती है।  हल्की दोमट मिट्टी को दो भागों में बांटा गया है। अपेक्षाकृत बलुई दोमट मिट्टी ,बलुई दोमट मिट्टी। अपेक्षाकृत बलुई दोमट मिट्टी  बालू की मात्रा अधिक होने से जल धारण करने की क्षमता अधिक होती है इस मिट्टी में टपकन फुहारों द्वारा सिंचाई उपयुक्त में मानी जाती है ।यह मैदान भूमिगत जल नीचा व ज्यादातर जगह पर पानी खारा होता है ।इस मृदा को रोसली  भी कहा जाता है इसका विस्ता...

हरियाणा राज्य का भौगोलिक परिचय

  हरियाणा राज्य का भौगोलिक परिचय      मैदान  :-  हरियाणा 27 डिग्री 39 सेंटीग्रेड से 30 डिग्री 35 डिग्री उत्तरी अक्षांश तथा 74 डिग्री 28 सेंटीग्रेड से 77 डिग्री 36 सेंटीग्रेड पूर्वी देशांतर के मध्य स्थित है।  .हरियाणा राज्य भारत का उत्तर पश्चिमी राज्य हैं। इसके उत्तर पूर्व में उत्तर प्रदेश ,उत्तराखंड, उत्तर पश्चिम में पंजाब, दक्षिण पश्चिम में राजस्थान तथा उत्तर पूर्व में हिमाचल प्रदेश स्थित है। हरियाणा भारत का एक ऐसा राज्य है। जिसकी सीमाएं न तो सागर तट को छूती है और ना ही अंतरराष्ट्रीय सीमा को।  हरियाणा का क्षेत्रफल 44212 वर्ग किलोमीटर है। क्षेत्रफल की दृष्टि से हरियाणा देश का 21 वा राज्य हैं।  हरियाणा का क्षेत्रफल भारत के कुल क्षेत्रफल का 1. 3 4 प्रतिशत है । हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़ है।  हरियाणा घग्घर और यमुना नदियों के मध्य एक विशाल मैदान है। हरियाणा के उत्तर पूर्व भाग में पंचकूला जिले में स्थित शिवालिक की श्रेणियां है जो कि  कुल क्षेत्रफल का 1.67 प्रतिशत है।  हरियाणा के दक्षिण भाग में फरीदाबाद, गुरु ग्राम ,रेवाड़ी तथा महेंद...