हरियाणा का प्रादेसिक नाम ब्रहावर्त था। महाभारत काल मे राजा कुरु के नाम पर कुरूक्षेत्र कहा जाने लगा। छठी शती में करुक्षेत्र को श्रीकंठजनपद कहा जाने लगा ।नोवी शती में प्रदेश की हरियाली के कारण इसे "हरियाल" कहा जाने लगा।दसवीं शताब्दी में महापुराण के रचयिता पुष्पदंत ने इस प्रदेश के लिए "हरियाणउ" शब्द का प्रयोग किया। 1327ई. में तोमर अभिलेख में हरियाना शब्द का उल्लेख है। हरियाणा शब्द की व्युत्पत्ति हारियानकम शब्द से है। हरि शब्द का अर्थ है-घोड़ो तथा यानम का अर्थ है सवारी ।इस प्रकार अर्थ हुआ घोडो की सवारी । प्राचीन इतिहास अहिया, धामली,पिंजौर के क्षेत्र ,सुकेतड़ी, पपलीना, कोटला, झिरका, आदि क्षेत्रों में पुरापाषाण कालीन उपकरण मिले हैं। मिताथल,दौलतपुर, सीसवाल, बनावली, राखीगढ़ी ,भगवानपुर,मिर्जापुरबाल, आदि स्थानों पर नगरीय सभ्यता के अवशेष मिले हैं। चित्रित धूसर मृदभांड हरियाणा में लगभग300 जगहों पर प्राप्त हुए है ।इनमे सुध ,भगवानपुर, राजा कर्ण का किला ,दौलतपुर आदि है। गांधारो ने राजा शांतनु के समय हरियाणा पेर आक्रमण किया । महाभारत का प्रसिद...